जालंधर कैंट: क्या जालंधर कैंट में अब सांस लेने के लिए भी आम नागरिकों को सेना के नए ‘साहब’ से परमिशन लेनी होगी? पिछले कुछ दिनों से कैंट इलाके में स्थानीय सैन्य प्रशासन (LMA) द्वारा आम जनता को जिस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है, उसने अब बर्दाश्त की सारी हदें पार कर दी हैं। आज तो हद ही हो गई जब हर चौराहे पर मिलिट्री पुलिस ने बैरिकेड लगाकर आम नागरिकों को बंधक जैसा महसूस करा दिया।
हेलमेट पहनने वालों को भी घंटों रोका, मूल निवासियों से ‘अपराधियों’ जैसा बर्ताव!
आज जालंधर कैंट के हर नुक्कड़ पर जो मंजर था, उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो आम नागरिक अपने ही देश में पराए हो गए हों। मिलिट्री पुलिस ने उन लोगों को भी घंटों रोककर परेशान किया जिन्होंने हेलमेट पहने हुए थे और जिनके पास सारे कागजात पूरे थे। सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि जो लोग जालंधर कैंट के मool निवासी (पुश्तैनी नागरिक) हैं, उन्हें भी बैरियरों पर धूप में घंटों खड़ा रखकर जलील किया गया।
सूत्रों की मानें तो यह पूरी ‘अफ़सरशाही का नंगा नाच’ कैंट एरिया में आए एक नए मिलिट्री ऑफिसर के इशारे पर हो रहा है, जो शायद अपनी वर्दी की हनक आम और बेकसूर जनता पर आज़माना चाहते हैं।
बड़ा सवाल: नियम सिर्फ आम जनता के लिए? अफ़सरशाही के गुरूर में चूर साहब जरा इधर भी देखें!
अगर नए सैन्य अफसर को इतनी ही अफ़सरशाही झाड़ने का शौक है, तो वह एक बात कान खोलकर सुन लें—कानून और नियम सिर्फ सिविलियंस पर लागू नहीं होते। सेना के नियमों और अफ़सरों पर भी वही संविधान लागू होता है जो इस देश के आम नागरिक पर होता है। जनता अब सीधे अफ़सरों से ये तीखे सवाल पूछ रही है:
शाम को कहाँ सोई होती है मिलिट्री पुलिस? जब शाम के समय आर्मी के जवान और बड़े अफसर सिविल मार्केट में नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, तब यह चेकिंग कहाँ चली जाती है? कैंट की सब्जी मंडी और बाजारों में आर्मी के जवान और अफसर अपने दोपहिया और चार पहिया वाहन सड़क के बीचों-बीच ऐसे पार्क कर देते हैं, जैसे वह सड़क उनकी बपौती या खुद की खरीदी हुई जायदाद हो!
भेड़-बकरियों की तरह खुला छोड़ने का आरोप: स्थानीय लोगों का गुस्सा इस कदर फूटा है कि उनका कहना है, “शाम होते ही आर्मी के कुछ जवानों को बाजारों में इस तरह नियमों की तौहीन करते देखा जा सकता है, जैसे किसी तबेले से भेड़-बकरियों को खुला छोड़ दिया गया हो।” इसकी वजह से पूरे इलाके में भयंकर ट्रैफिक जाम लगता है, लेकिन तब किसी अफसर को अनुशासन याद नहीं आता।
“पहले अपने जवानों को सुधारो, फिर सिविल जनता पर रौब झाड़ो!”
कैंट की जनता का साफ कहना है कि अफ़सर साहब, पहले अपने महकमे और जवानों को अनुशासन का पाठ पढ़ाइए, उन्हें तबेले की तरह बाजारों में गाड़ियां खड़ी करने से रोकिए, उसके बाद आम जनता को परेशान करने निकलिएगा।
जरा सोचिए: > “अगर यही हाल सिविल पुलिस अपना ले और सेना के जवानों व अफ़सरों की गाड़ियों के बीच सड़क पर चालान काटने शुरू कर दे, तो सेना के इन बड़े अफ़सरों को कैसा प्रतीत होगा? क्या तब इनका अनुशासन और गुरूर सलामत रहेगा?”
जनता की मांग: इस तुगलकी चेकिंग को तुरंत बंद किया जाए और कैंट के मूल निवासियों को परेशान करना बंद हो, नहीं तो यह जन-आक्रोश अब सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
इस खबर को इतना शेयर करो कि यह सीधा दिल्ली में बैठे रक्षा मंत्रालय और सेना के आला अधिकारियों तक पहुंचे ताकि कैंट के इस नए अफसर का गुरूर चकनाचूर हो सके!

